Monday, May 6, 2013

11

घुटन 
अविश्वसनीय 
पीड़ा 
अविश्वसनीय 
रोज चले आते हैं मेरे बिस्तर पर 
तकिये के नीचे 
बुदबुदाते हैं 
घुस जाते हैं मेरे सपनों में 
नोच नोच कर खाते हैं उन खूबसूरत कहनियों को 
जिनमे मैं जिंदा रहना चाहता हूँ ........ताउम्र 
जैसे एक नदी अपनी ही धुन में बहना चाहती है हमेशा .

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