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मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है....

मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है....
जलती दोपहरी है 
पसीने से तर बतर मैं 
रुमाल रूम पर भूल गया हूँ 
और तुम मुझे याद आ रही हो ..
तुम्हरी हथेलियों का ठंडापन 
गर्म साँसे 
सन्नाटा 
भीगी हुई हंसी 
बिना शब्दों वाली भाषा
सच कहता हूँ-
मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है ......
सड़को पर दौड़ती उदास बसे 
ट्रेफिक का शोर 
अपने निजीपन को बचाए रखने की होड़ 
कही कुछ छुट जाने का डर
हाथों में दबी कैरिएर की फाइल 
इन सबके बीच -
तुम मुझे याद आ रही हो 
लेकिन सच कहता हूँ -
मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है .

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छाता

एक दिन तुमने मुझे अपना छाता दिया था मैं तुम्हारे घर के दरवाजे पे खड़ा था और बाहर बारिश हो रही थी बहुत कुछ कहना चाहता था तुमसे पर तुम्हारा घर इतना बड़ा है कि - मेरे अल्फ़ाज़ तुम्हारे कानों तक पहुँचने से पहले ही कहीं खो गये ज़रा देख लेना कहीं कोई थककर तुम्हारे तकिये के पास पड़ा सुस्ता न रहा हो या तुम्हारे बालों में आके उलझ गया हो जैसे मैं उलझ जाता हूँ  मैं जब भी मिलता हूँ तुमसे ये घड़ी के कांटे मुझे काँटों की तरह चुभते हैं साले आराम से चलने बजाय दौड़ने लगते हैं तुम्हारा छाता अभी भी मेरे पास है जब भी लौटाने की सोचता हूँ ... बारिश आ जाती है।

कुछ बेवज़ह

तेरे ख्वाबों से जिंदा है मेरी कहानियां अब तक , तुझे शब्दों में पिरोउं तो ऐसा लगता है  . खिड़की से झांकती एक शाम अधूरी , दरवाज़े पे खड़ा है कोई ऐसा लगता है. तेरे गाँव का रास्ता मुझे मालूम है फिर भी  तेरे घर तक नहीं पहुचुँगा ऐसा लगता है . मेरे ख्यालों के दीवारों पर जब धुप उतरती है , मैं लिखता हूँ कुछ बेवज़ह ऐसा लगता है.