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कुछ हलके फुल्के ......लम्हों की बात ...

kolavaree d .....


जो सोचकर मैं उड़ रहा था आसमान में , हकीक़त उससे भी ज्यादा जमीनी निकली
मैं तेरी खातिर छोड़ देता इस ज़िन्दगी को भी , लेकिन ज़िन्दगी तुझसे ज्यादा कमीनी निकली....

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confusion ........




मेरी हर कहानी में तेरा जिकर क्यूँ हैं
कुछ होना नहीं है फिर भी इंतनी फिकर क्यूँ हैं...
कुछ बाते हैं जो अक्सर समझ में नहीं आती ...
life तेरी programing में इतना error क्यूँ हैं....

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frustation .....



कैसे तुमको दिखलाऊं इस दिल पे कितनी चोट है
ग़ालिब की हजारों ख्वाहिशें  मेरी तो फिर भी एक है
शायद तुम्हारे हिस्से में होंगे पिज्जा बर्गर
मेरे हिस्से में तो बस फ्यूचर की खाली प्लेट है .
काश! ज़िन्दगी तू भी मेरे संग डेटिंग पर चलती
पर न जाने क्यूँ  ट्रेन तुम्हरी इतनी ज्यादा लेट है .


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Nostalgia




हाल मत पूछो इस दिल से ज़िन्दगी...
मत पूछो ये दुनिया हमे कितना प्यार करती है
जिन गलियों में कभी हमने गुजारा था बचपन
आज वो गलियां हमे पहचानने से इंकार करती हैं . 

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मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है....

मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है.... जलती दोपहरी है  पसीने से तर बतर मैं  रुमाल रूम पर भूल गया हूँ  और तुम मुझे याद आ रही हो .. तुम्हरी हथेलियों का ठंडापन  गर्म साँसे  सन्नाटा  भीगी हुई हंसी  बिना शब्दों वाली भाषा सच कहता हूँ- मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है ...... सड़को पर दौड़ती उदास बसे  ट्रेफिक का शोर  अपने निजीपन को बचाए रखने की होड़  कही कुछ छुट जाने का डर हाथों में दबी कैरिएर की फाइल  इन सबके बीच - तुम मुझे याद आ रही हो  लेकिन सच कहता हूँ - मौसम बिलकुल भी रोमांटिक नहीं है .

छाता

एक दिन तुमने मुझे अपना छाता दिया था मैं तुम्हारे घर के दरवाजे पे खड़ा था और बाहर बारिश हो रही थी बहुत कुछ कहना चाहता था तुमसे पर तुम्हारा घर इतना बड़ा है कि - मेरे अल्फ़ाज़ तुम्हारे कानों तक पहुँचने से पहले ही कहीं खो गये ज़रा देख लेना कहीं कोई थककर तुम्हारे तकिये के पास पड़ा सुस्ता न रहा हो या तुम्हारे बालों में आके उलझ गया हो जैसे मैं उलझ जाता हूँ  मैं जब भी मिलता हूँ तुमसे ये घड़ी के कांटे मुझे काँटों की तरह चुभते हैं साले आराम से चलने बजाय दौड़ने लगते हैं तुम्हारा छाता अभी भी मेरे पास है जब भी लौटाने की सोचता हूँ ... बारिश आ जाती है।

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