Sunday, July 4, 2010

.................?

एक ख़ामोशी और आह,
कुछ उदास सपने
और एक डर
-जो तुम्हे मुस्कुराने से रोकता है
बस एक लकीर है ,
जो पत्थेर की नहीं है
और उम्मीद ...............
जो हमेशा कायम रहेगी
देखो अपने आपको आईने में .......
और सोचो क्या ये तुम हो ?
आँखे कही शर्म से झुक तो नहीं रही,
ये बाल इतने उलझे हुए क्यों है?
सबकुछ बदलता है वक़्त के साथ ,
खुद को बदलो ...................
जिंदगी में sangharsh होते है चमत्कार नहीं