Saturday, December 4, 2010

सफ़र जारी है ..........

बहुत दुर तक अभी जाना है....
इरादों की सीढिया हैं ,
ख्वाहिसों से भरी है जेब
कई खवाब हैं जिनके एड्रेस ढूढ़ने हैं .
सुना है -
एक खूबसूरत गाँव हैं ...
जहाँ से मिलती हैं दिल की ट्रेने ,
किसी दिन बैठकर उसमे  सारी  दुनिया घूमूँगा .
लेकिन उससे पहले -
चढ़नी हैं  सीढिया
यादों को तह करके रखना है आलमारी में
लगाने   हैं ख्वाहिसों के पेड़
ढूढ़ने हैं कई  एड्रेस.
तब तक लिए ,
सफ़र जारी है ..........

Thursday, September 9, 2010

................

फलक,
रात,
तारे,
रौशनी,
चाँद,
और बारिस.
तुम कहती हो पागलपन है ,
मैं कहता हूँ दीवानापन .
एक स्पर्श ,
जो बारिस से नहला देती है ,
खवाहिश जो तारों की तरह मद्धिम है ,
और चाँद इतने करीब होकर भी दूर.
एक सिमटा हुआ फलक ,
जहां  आशा और निराशा मिलते हैं किसी बिंदु पर.
ये पागलपन नहीं है ,
ये एक नई दुनिया की खोज है -
यहाँ  जिंदगी एक नशा है.














Sunday, July 4, 2010

.................?

एक ख़ामोशी और आह,
कुछ उदास सपने
और एक डर
-जो तुम्हे मुस्कुराने से रोकता है
बस एक लकीर है ,
जो पत्थेर की नहीं है
और उम्मीद ...............
जो हमेशा कायम रहेगी
देखो अपने आपको आईने में .......
और सोचो क्या ये तुम हो ?
आँखे कही शर्म से झुक तो नहीं रही,
ये बाल इतने उलझे हुए क्यों है?
सबकुछ बदलता है वक़्त के साथ ,
खुद को बदलो ...................
जिंदगी में sangharsh होते है चमत्कार नहीं