Wednesday, February 16, 2011

बारिश की बूंदे फूलों की खुश्बू
इनसे भी महंगी तुम्हरी  हंसी है 
नमी रेत की और समुन्दर की  लहरें 
इनसे भी बढकर तुम्हरी ख़ुशी है 
ढलता हुआ सूरज किरण चांदनी की 
शायद तुम्हारे लिए ही बनी है 
लिखने को करता है दिल तो बहुत कुछ 
मगर मेरे पास शब्दों की कमी है...............

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